KNOWLEDGE HUB : ज्ञान केंद्र (बूझो तो जानें)

शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025

SWIFTLY SWIFT: The common swift (Apus apus) - "आसमान के मालिक"

स्विफ्टली स्विफ्ट: SWIFTLY SWIFT

The common swift (Apus apus)


Common swift: key facts

SizeAround 16-17cm
WeightAround 40g
Breeding seasonMay-July
LifespanUp to 20 years
HabitatAnywhere with flying insects
Food preferencesAny kind of flying insect
ThreatsLoss of nesting places and food sources

हाउस मार्टिन को उसके हल्के रंग के निचले हिस्से से पहचाना जा सकता है।
[फोटो: डेनिस जैकबसेन/ Shutterstock.com]

वैज्ञानिक इस पक्षी को ट्रैक कर रहे थे और उन्होंने एक हैरान करने वाली खोज की है: यह बिना ज़मीन पर उतरे दस महीने तक हवा में रह सकता है। यह किसी भी पक्षी के लिए  लगातार उड़ान का अब तक का सबसे लंबा रिकॉर्ड किया गया समय है। 

इस लंबे समय के दौरान, यह पक्षी उड़ते हुए ही अपनी सभी ज़रूरतें पूरी करता है। यह कीड़े-मकोड़े पकड़ता है, नदियों से पानी पीता है, और उड़ते हुए ही मेटिंग भी करता है। 

एक और कमाल की बात: यह हवा में उड़ते हुए सोता भी है। यह पक्षी बहुत ऊँचाई पर जाता है, और फिर, जब यह ग्लाइड करते हुए नीचे आता है, तो यह अपने दिमाग की आधी एक्टिविटी बंद कर देता है, यानी ऑटोपायलट पर सो जाता है। 

लेकिन इसकी एकमात्र कमज़ोरी ज़मीन है। इसके पैर इतने कमज़ोर और अविकसित होते हैं कि अगर यह कभी ज़मीन पर उतर जाए, तो दोबारा उड़ नहीं पाता। इस जीव को सिर्फ़ एक चीज़ के लिए बनाया गया है: आसमान। 

यह कॉमन स्विफ्ट है। ये पक्षी सच में "आसमान के मालिक" हैं। 

कॉमन स्विफ्ट की पहचान कैसे करें

स्विफ्ट पक्षी के अंडे आम पक्षियों के अंडों की तुलना में थोड़े लंबे होते हैं। हर मौसम में मादा स्विफ्ट दो से तीन हल्के सफेद रंग के अंडे देती हैं। उनके घोंसले पतले डंठलों और पंखों से बने होते हैं जिन्हें माता-पिता हवा में पकड़ते हैं या उड़ान के दौरान इकट्ठा करते हैं। इस बेतरतीब और अव्यवस्थित ढंग से व्यवस्थित घोंसले की सामग्री को फिर जल्दी सूखने वाली लार से चिपकाया जाता है। 

कॉमन स्विफ्ट का प्राकृतिक आवास कैसा दिखता है?

स्विफ्ट पक्षी सादे रंगों के होते हैं। इनके पंख गहरे रंग के होते हैं, सिवाय गले पर मौजूद हल्के रंग के धब्बे के जो उड़ते समय मुश्किल से दिखाई देता है। चूंकि स्विफ्ट पक्षी शायद ही कभी ज़मीन पर उतरते हैं, इसलिए इन्हें पहचानने का एकमात्र तरीका इनके शरीर की बनावट और उड़ान का तरीका है। ये पक्षी आमतौर पर समूहों में शिकार करते हैं और तेज़ और खतरनाक दिखने वाले उड़ान करतब दिखाने का आनंद लेते हैं। इनकी पहचान इनके दोमुंहे पूंछ वाले पंख, गहरे रंग के पंखों और लंबे, पतले, हंसिया के आकार के पंखों से आसानी से की जा सकती है। 

कॉमन स्विफ्ट की आवाज कैसी होती है?

उड़ते समय स्विफ्ट पक्षी को न केवल उसके आकार से बल्कि उसकी आवाज़ से भी आसानी से पहचाना जा सकता है। विशेषकर जब वह बड़े समूहों में शिकार करता है, तो उसकी आवाज़ अक्सर सुनाई देती है: "श्रीई-श्रीई"। हालाँकि, उसका कोई विशिष्ट गीत नहीं होता।

कॉमन स्विफ्ट के अंडों की पहचान कैसे करें

पर्यावास चुनते समय, सामान्य स्विफ्ट पक्षी मुख्य रूप से अपने भोजन की उपलब्धता को ध्यान में रखते हैं। उड़ने वाले कीड़ों की प्रचुर मात्रा उनके लिए आवश्यक है। स्विफ्ट पक्षी भोजन के मामले में ज्यादा नखरे नहीं करते और खेतों, घास के मैदानों के साथ-साथ गांवों और कस्बों में भी शिकार करते हैं। वे ऐसे क्षेत्रों को भी पसंद करते हैं जहां बड़े जलाशय हों, ताकि बारिश होने पर भी उन्हें भरपूर कीड़े मिल सकें। 

स्विफ्ट पक्षी अपना घोंसला कहाँ बनाता है?

मूल रूप से, स्विफ्ट पक्षी चट्टानों पर प्रजनन करते थे और चट्टानों की दरारों में घोंसला बनाते थे। बाद में वे धीरे-धीरे मानव बस्तियों के करीब आने लगे। आज भी, उनमें से अधिकांश इमारतों के अग्रभागों और दीवारों की दरारों में घोंसला बनाते हैं। हालांकि, ये घोंसले बनाने की जगहें तेजी से कम होती जा रही हैं, क्योंकि आधुनिक अग्रभागों और पुनर्निर्मित इमारतों में अब स्विफ्ट पक्षियों के लिए कोई जगह नहीं बची है। कभी-कभी, स्विफ्ट पक्षियों को पेड़ों के खोखले तनों में भी घोंसला बनाते देखा जा सकता है। 

स्विफ्ट पक्षी कब प्रजनन करते हैं?

कॉमन स्विफ्ट पक्षी मई में प्रजनन शुरू करते हैं। प्रजनन काल 27 दिनों तक चल सकता है। यह उनके जीवन का एकमात्र समय होता है जब स्विफ्ट पक्षी मुख्य रूप से बैठे रहते हैं। बाकी समय में साथी बारी-बारी से अंडों को सेते हैं और भोजन की तलाश करते हैं। अंडे से निकलने के बाद, नन्हे पक्षी शुरू में पंखहीन, अंधे होते हैं और पूरी तरह से अपने माता-पिता पर निर्भर होते हैं। अगले कुछ हफ्तों तक, उन्हें बड़ी मात्रा में उड़ने वाले कीड़े खिलाए जाते हैं। लगभग 40 दिनों के बाद, वे घोंसला छोड़ने के लिए पर्याप्त परिपक्व हो जाते हैं। फिर हवा में उनका जीवन तुरंत शुरू हो जाता है, क्योंकि इसके बाद वे वयस्कों की तरह ही केवल उड़ते हुए सोते हैं। 

सर्दियों में कॉमन स्विफ्ट पक्षी कहाँ जाते हैं?

स्विफ्ट पक्षी अपने प्रजनन स्थलों पर तीन महीने से कुछ अधिक समय तक ही रहते हैं। यहाँ तक कि सबसे नए पक्षी भी अगस्त में दक्षिण की ओर प्रस्थान कर देते हैं। स्विफ्ट पक्षी अफ्रीका के लिए उड़ान भरते हैं और अटलांटिक तट के किनारे प्रवास करते हुए अपने शीतकालीन आवासों तक पहुँचते हैं। और वहाँ पहुँचने के बाद भी, कई स्विफ्ट पक्षी बारिश का पीछा करते हुए कीड़ों की अपनी ज़रूरत को पूरा करने के लिए आगे बढ़ते रहते हैं। वसंत ऋतु में, स्विफ्ट पक्षी अप्रैल और मई के बीच वापस यहाँ आ जाते हैं।

स्विफ्ट पक्षी क्या खाते हैं?

स्विफ्ट पक्षी कीटभक्षी होते हैं। वे मच्छर, पतंगे, एफिड और कई अन्य उड़ने वाले कीड़े खाते हैं। वे खाने के मामले में नखरे नहीं करते! जब मौसम के कारण भोजन की कमी हो जाती है, तो स्विफ्ट पक्षी बारिश का पीछा करते हुए लंबी दूरी तय करते हैं और बाकी सब कुछ पीछे छोड़ देते हैं। ऐसे मामलों में, युवा स्विफ्ट पक्षी एक प्रकार की "भूखमरी की नींद" में चले जाते हैं और अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को बहुत कम कर देते हैं, जिससे वे 14 दिनों तक बिना भोजन के रह सकते हैं। 

अस्वीकरण: क्रेडिट संबंधित मालिक को। 

Source: Linkedin Post & Plantura Magazine  

गुरुवार, 18 दिसंबर 2025

“चेहरे या शरीर पर क्या लगाना स्वास्थ्यकर और वैज्ञानिक दृष्टि से सुरक्षित है: बाजारू क्रीम, मक्खन या घी?”

चेहरे या शरीर पर क्या लगाना स्वास्थ्यकर और वैज्ञानिक दृष्टि से सुरक्षित है: बाजारू क्रीम, मक्खन या घी?

What is healthy and scientifically safe to apply to the face or body: commercial creams, butter, or ghee?

यह बेहद रोचक प्रश्न है जो कि हर भारतीय युवा, प्रौढ़ एवं वृद्धों में और खासकर लड़कियों एवं महिलाओं के मन में रहता ही है, लेकिन उन्हें इसका संतोषजनक जवाब नहीं मिल पता है। आइए आज इसका उत्तर हम त्वचा-विज्ञान (Dermatology), पोषण विज्ञान (Nutrition Science) और टॉक्सिकोलॉजी (Toxicology) तीनों के आधार पर समझेंगे।


🔹 1. बाजारू क्रीम (Commercial Creams)

🔸 संरचना:

अधिकांश बाजार में मिलने वाली क्रीमों में पाए जाते हैं –

  • Synthetic emulsifiers (जैसे Sodium Lauryl Sulfate, PEG compounds)

  • Petroleum derivatives (Mineral oil, Paraffin)

  • Preservatives (जैसे Parabens, Formaldehyde releasers)

  • Fragrances और Colorants

  • कभी-कभी silicones और alcohols

🔸 शोध निष्कर्ष:

  • Journal of Applied Toxicology (2019) में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, कई सौंदर्य प्रसाधनों में endocrine-disrupting chemicals (EDCs) जैसे parabens और phthalates पाए जाते हैं, जो हार्मोन संतुलन पर असर डाल सकते हैं।

  • Environmental Health Perspectives (2020) ने बताया कि दीर्घकालिक उपयोग से कुछ लोगों में contact dermatitis, allergic reactions और skin barrier dysfunction हो सकता है।

  • हालांकि, उच्च-गुणवत्ता वाली (dermatologically tested, hypoallergenic) क्रीमें अल्पावधि में हानिकारक नहीं मानी जातीं।

🔸 निष्कर्ष:

यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है या आप रासायनिक अवशेषों से बचना चाहते हैं, तो सिंथेटिक क्रीम का नियमित उपयोग वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं है।


🔹 2. मक्खन (Butter)

🔸 संरचना:

  • Fatty acids (mainly saturated fats)

  • Vitamins A, D, E, K

  • Lactic acid (यदि घर का बना है)

🔸 वैज्ञानिक प्रभाव:

  • International Journal of Cosmetic Science (2018) के अनुसार, मक्खन में मौजूद fatty acids और vitamin E त्वचा को कुछ हद तक नमी देते हैं।

  • लेकिन इसकी saturated fat मात्रा बहुत अधिक होती है, जो त्वचा के रोमछिद्रों (pores) को बंद कर सकती है — जिससे acne और comedones हो सकते हैं।

  • यह गर्म मौसम में त्वचा पर पिघलकर rancid smell और बैक्टीरियल वृद्धि को बढ़ा सकता है।

🔸 निष्कर्ष:

मक्खन सूखी और ठंडी जगहों में सीमित रूप से उपयोगी है, लेकिन चेहरे पर लगाने के लिए वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित नहीं है।


🔹 3. घी (Clarified Butter)

🔸 संरचना:

  • Medium-chain fatty acids (MCTs)

  • Vitamin A, E, D, K, linoleic acid

  • No lactose, no casein (जो एलर्जी को कम करता है)

🔸 शोध साक्ष्य:

  • Ayurveda Journal of Health (2017) के अनुसार, शुद्ध देसी घी में anti-inflammatory और antioxidant गुण पाए जाते हैं।

  • Journal of Cosmetic Dermatology (2020) में यह पाया गया कि topical application of ghee त्वचा की barrier function को सुधारता है, और नमी बनाए रखने में सक्षम है।

  • घी में Vitamin E और linoleic acid होने से यह collagen maintenance में सहायक माना गया है।

  • साथ ही इसमें anti-bacterial fatty acids (butyric acid) पाए जाते हैं जो त्वचा संक्रमण को घटाते हैं।

🔸 निष्कर्ष:

शुद्ध देशी घी (विशेषतः गाय का A2 घी) यदि सीमित मात्रा में साफ त्वचा पर लगाया जाए, तो यह सबसे प्राकृतिक, non-toxic और skin-healing विकल्प है।


🔹 तुलनात्मक सारणी

गुण / तत्वबाजारू क्रीममक्खनघी
नमी (Moisturization)कृत्रिम, अस्थायीमध्यमगहरी और दीर्घकालिक
रासायनिक संरचनाअधिकप्राकृतिक, पर संतृप्तपूर्णतः प्राकृतिक
रोमछिद्रों पर प्रभावअक्सर बंद करती हैबंद कर सकती हैहल्का, non-comedogenic
संक्रमण जोखिमpreservatives से एलर्जीबैक्टीरिया बढ़ा सकताजीवाणुरोधी गुण
त्वचा-सुधार गुणसीमितसीमितवैज्ञानिक रूप से प्रमाणित healing
दीर्घकालिक सुरक्षासंदिग्धमध्यमसुरक्षित (यदि शुद्ध हो)

🔹 निष्कर्ष (Scientific Verdict)

त्वचा या चेहरे पर लगाने के लिए सबसे उपयुक्त और सुरक्षित विकल्प — शुद्ध देसी घी है।

इसका कारण है कि यह —

  • रासायनिक रहित है

  • शरीर के तापमान पर स्वाभाविक रूप से पिघल जाता है

  • त्वचा की आंतरिक परत तक नमी पहुँचाता है

  • एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन से भरपूर है

  • त्वचा रोग, फटने, रूखापन और जलन को शांत करता है


🔹 उपयोग का वैज्ञानिक तरीका:

  1. रात में सोने से पहले हल्के गुनगुने घी से मालिश करें।

  2. सुबह गुनगुने पानी से धो लें।

  3. यदि तैलीय त्वचा है, तो सप्ताह में 2–3 बार ही लगाएँ।

  4. यदि घी ऑर्गेनिक या A2 दूध से बना हो, तो सर्वोत्तम परिणाम मिलते हैं।

मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

“साबुन, कीटाणु और हमारा शरीर: क्या हम अनजाने में अपने रक्षक सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर रहे हैं?”

“साबुन, कीटाणु और हमारा शरीर: क्या हम अनजाने में अपने रक्षक सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर रहे हैं?”

“Soap, germs, and our bodies: Are we unknowingly destroying our protective microorganisms?”

आजकल मार्केट में तमाम तरह के साबुन उपलब्ध हैं नहाने के, जिनमें बढ़िया खुशबूदार एवं स्वास्थ्य को लेकर तमाम दावे होते हैं। यहाँ तक कि जानवरों के नहलाने के लिए भी बाजार में साबुन उपलब्ध हैं। पहले कहा जाता था कि लाइफबॉय साबुन कुत्तों को नहलाने के लिए बना था, जिसे हिंदुस्तान लीवर कंपनी ने भारत में आम लोगों के लिए लॉन्च कर दिया। अब लेकिन अलग स्थिति है और बहुतेरे ब्रांडस के Soap नहाने व धोने के लिए बाजार में उपलब्ध हैं। 

भारत में बिकने वाले साबुनों  की गुणवत्ता और उनके स्वास्थ्य को लेकर किये जाने वाले दावे हमेशा ही संदिग्ध रहे हैं। क्योंकि यहाँ विभिन्न रूपों में फैला भ्रष्टाचार एवं गुणवत्ता को मापने के लिए मापन की दोषपूर्ण प्रयोगशालाएं एवं संसाधन शुरू से ही दूषित रहे हैं। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी एवं व्यपार जगत में फैला करप्शन इन सब चीजों को होने भी नहीं देता, जिससे पब्लिक हमेशा परेशान होती है और शिकायत भी करती है पर नतीजा शिफर ही रहता है। 

खैर इन सब मुद्दों के अलावा हम ये जानना चाहते हैं कि ये तमाम ब्रांडस के नहाने के साबुन हमारे शरीर के Micro-flora के लिए कितने सही व गलत हैं। क्योंकि हमारे शरीर में अलग अलग जगहों पर विभिन्न प्रकारों के सूक्ष्म जीवों की भरमार है, जो कि हमारे शरीर के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं। नवजातों से लेकर बच्चों, युवाओं, तथा नोजवानों एवं वृद्धावस्था में भी साबुन का उपयोग उनके शरीर के रसायनों में परिवर्तन करने के साथ साथ तथा घटक ऐलर्जी पैदा कर सकते हैं। 

आज हम Microbiological Study के आधार पर इस बात की  शोधपरक पड़ताल करेंगे कि यह तमाम साबुन हमारे लिए कितने जरूरी है और कितने ही यह हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक अथवा नुकसानदायक हैं। आइए इसे हम बिन्दुवार विभिन्न तथ्यों के आधार पर समझने की कोशिश करेंगे।  

🧬 Microbiome पर

“The human body is not just human; it is a complex ecosystem.”
— Dr. Martin Blaser (Microbiome Researcher)

“Not all microbes are enemies; many are essential partners in health.”
— NIH Microbiome Project

यह प्रश्न साबुन, बाज़ारू दावों और मानव शरीर के Micro-flora (Skin Microbiome) के संबंध को लेकर बहुत ही रोचक, महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक दृष्टि से प्रासंगिक है। यहाँ सबसे पहले हम ये जानेंगे कि मानव शरीर का माइक्रो-फ़्लोरा आखिर है क्या? 


मानव शरीर का Micro-flora (Skin Microbiome) क्या है?



अध्ययन के आधार हम ये कह सकते हैं कि मानव त्वचा पर खरबों सूक्ष्मजीव (Microorganisms) रहते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • Bacteria

    • Staphylococcus epidermidis

    • Cutibacterium acnes

  • Fungi (खमीर/फंगस)

    • Malassezia प्रजातियाँ

  • Viruses & Mites (बहुत सीमित मात्रा में)

ये सूक्ष्मजीव रोगजनक जीवों से मुकाबला करते हैं तथा त्वचा की इम्यूनिटी को प्रशिक्षित करते हैं, और त्वचा की नमी, pH और barrier function बनाए रखते हैं। इसी संतुलन को Eubiosis कहा जाता है। जब यह बिगड़ता है, तो Dysbiosis होती है। 


साबुन का त्वचा के Micro-flora पर सीधा प्रभाव



(A) पारंपरिक साबुन (Conventional Soaps)

अधिकांश आम साबुन: 9 से 10 pH के होते हैं और डिटर्जन्ट बेस्ड होते हैं तथा Strong degreasing action रखते हैं। इसके Microbiological प्रभाव के तहत लाभकारी बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाते हैं। साथ ही Acid mantle (त्वचा का प्राकृतिक pH ≈ 4.5–5.5) टूटता है और Opportunistic pathogens को बढ़ने का मौका मिलता है। 

तथ्य: Clinical studies में पाया गया है कि: बार-बार alkaline साबुन उपयोग से Eczema, Acne, Fungal infections का खतरा बढ़ता है।


(B) Antibacterial साबुन (जैसे Triclosan युक्त)

ऐसे कई ब्रांड हैं जो “99.9% germs kill” का दावा करते हैं। लेकिन Microbiological तथ्य कहते हैं कि ये साबुन Non-selective killing करते हैं तथा Good bacteria और bad bacteria में फर्क नहीं करते और इनसे Microbial resistance भी  विकसित हो सकती है। 

Journal of Antimicrobial Chemotherapy में प्रकाशित शोध के अनुसार: 

Antibacterial soaps से Skin microbiome diversity घटती हैजिससे long-term immunity कमजोर हो सकती है।

 


(C) Herbal / Ayurvedic साबुन

नीम, तुलसी, चंदन, हल्दी आदि युक्त साबुन।

सकारात्मक पक्ष: कुछ जड़ी-बूटियों में mild antimicrobial गुण होते हैं तथा कम हानिकारक (यदि pH संतुलित हो)

नकारात्मक पक्ष: “Herbal” का मतलब हमेशा “Safe” नहीं होता है और Essential oils अधिक मात्रा में हों तो irritation भी होने लगता है। साथ ही इनमें Standardization की कमी (भारत में बड़ी समस्या) भी होती है।  


शरीर के अलग-अलग हिस्सों में Micro-flora का अंतर

फ्लोरिडा अटलांटिक विश्वविद्यालय एवं वेलिंगटन मेडिकल रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों के अनुसार बैक्टीरिया ऐसे अत्यंत सूक्ष्म और एक कोशिकीय जीव हैं जो कि पृथ्वी पर सबसे पहले ज्ञात जीवन रूपों में से एक हैं। पृथ्वी पर लाखों विभिन्न प्रकार के ज्ञात और अज्ञात बैक्टीरिया हैं जो कि पूरी दुनिया में हर संभव वातावरण में रहते हैं। वे मिट्टी, समुद्री जल और पृथ्वी की पपड़ी के भीतर गहराई में रहते हैं। कुछ बैक्टीरिया के रेडियोएक्टिव कचरे में भी रहने के दृष्‍टांत देखे गए हैं। कई बैक्टीरिया लोगों और जानवरों के शरीर पर और उनमें रहते हैं—त्वचा पर और वायुमार्ग में, मुंह और पाचन केंद्र में, प्रजनन और पेशाब पथ में होते हैं, लेकिन कोई नुकसान नहीं पहुंचाते। ऐसे बैक्टीरिया को रेजिडेंट फ्लोरा कहा जाता है। हमारे आसपास की वनस्पतियों में उतने बैक्टीरिया तो होते ही हैं जितनी हमारे शरीर में कोशिकाएं होती हैं। 

बहुत से रेजिडेंट फ्लोरा समूह वास्तव में लोगों के लिए सहायक होते हैं—उदाहरण के लिए, खाना पचाने में मदद करके या अन्य अधिक खतरनाक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोककर।केवल कुछ प्रकार के बैक्टीरिया आमतौर पर सक्रिय बीमारी से जुड़े होते हैं और उन्हें रोगजनकों के रूप में जाना जाता है। कभी-कभी, कुछ स्थितियों में, रेजिडेंट फ्लोरा वनस्पति रोगजनकों के रूप में कार्य कर सकते हैं और सक्रिय बीमारी का कारण बन सकते हैं। कुछ बैक्टीरिया सूजन को ट्रिगर कर सकते हैं जो हृदय, फेफड़े, तंत्रिका तंत्र, किडनी या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल मार्ग को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकते हैं। कुछ बैक्टीरिया (जैसे हैलिकोबैक्टर पायलोरी) कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।


Source: https://www.msdmanuals.com/

मंगलवार, 14 अक्टूबर 2025

A road surface made from compressed cork, the bark of cork oak trees

संपीड़ित कॉर्क, कॉर्क ओक के पेड़ों की छाल से बनी एक सड़क सतह
A road surface made from compressed cork, the bark of cork oak trees

पुर्तगाल में, इंजीनियरों ने संपीड़ित कॉर्क, कॉर्क ओक के पेड़ों की छाल से बनी एक सड़क सतह विकसित की है, जो कटाई के बाद फिर से उग आती है, जिससे यह नवीकरणीय और पर्यावरण के अनुकूल बन जाती है।


रिसर्चगेट के एक शोध के अनुसार, कॉर्क- आधारित यह फुटपाथ पारंपरिक डामर की तुलना में टायरों के शोर को 30% तक कम कर सकता है। यह सामग्री कंपन को अवशोषित करती है और ध्वनि को कम करती है, जिससे यह शहरी क्षेत्रों के लिए आदर्श बन जाती है जहाँ ध्वनि प्रदूषण एक चिंता का विषय है।

कॉर्क में प्राकृतिक तापीय प्रतिरोध भी होता है, जिसका अर्थ है कि यह पुर्तगाल की भीषण गर्मियों में गर्मी को दूर रखने में मदद करता है। इससे शहरी गर्मी का जमाव कम होता है और सड़कों की उम्र बढ़ती है। यह जल-प्रतिरोधी, लचीला और जैव-निम्नीकरणीय भी है, जिसका अर्थ है कम दरारें, कम रखरखाव और कम पर्यावरणीय प्रभाव। पुर्तगाल, जो दुनिया के सबसे बड़े कॉर्क वनों का घर है, अपने मूल संसाधनों को जलवायु-प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे में बदलने में अग्रणी है।

In Portugal, engineers have developed a road surface made from compressed cork, the bark of cork oak trees, which regrows after harvesting, making it renewable and eco-friendly. According to a research from ResearchGate, this cork-based pavement can reduce tire noise by up to 30% compared to traditional asphalt. The material absorbs vibrations and dampens sound, making it ideal for urban areas where noise pollution is a concern.

Cork also has natural thermal resistance, meaning it helps repel heat during Portugal’s hot summers. This reduces urban heat buildup and extends the lifespan of the road. It’s also water-resistant, elastic, and biodegradable, which means fewer cracks, less maintenance, and a lower environmental footprint. Portugal, home to the world’s largest cork forests, is leading the way in turning its native resources into climate-resilient infrastructure.

Source: 

https://www.linkedin.com/in/ershad-ahmad-33470426?miniProfileUrn=urn%3Ali%3Afsd_profile%3AACoAAAVxkNgBBF4bgRggP3HVYVcqgQrBUblDCnw&lipi=urn%3Ali%3Apage%3Ad_flagship3_detail_base%3BcHpYM%2B%2BWSbuxZHlqxC8TDA%3D%3D 

सोमवार, 22 सितंबर 2025

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए गेट्स कैम्ब्रिज छात्रवृत्ति:अल-फनार

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए गेट्स कैम्ब्रिज छात्रवृत्ति


PICS BY AL FANAR MEDIA


प्रतिष्ठित गेट्स कैम्ब्रिज छात्रवृत्ति के लिए आवेदन अब खुले हैं, जो दुनिया भर के असाधारण छात्रों को - सभी अरब देशों सहित - कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पूर्ण वित्तपोषित स्नातकोत्तर अध्ययन करने का अवसर प्रदान करती है।

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के ऐतिहासिक दान से 2000 में स्थापित, यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कार्यक्रम उन व्यक्तियों को सहायता प्रदान करता है जो असाधारण शैक्षणिक योग्यता, मजबूत नेतृत्व क्षमता और दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए गहरी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हैं।

गेट्स कैम्ब्रिज स्कॉलरशिप व्यापक वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं। ये पूरी ट्यूशन फीस, रखरखाव भत्ता (वर्तमान में 2024-25 के लिए 12 महीनों के लिए £21,000 निर्धारित), यूके आने-जाने का खर्च, वीज़ा आवेदन शुल्क, इमिग्रेशन स्वास्थ्य अधिभार और आगमन भत्ता प्रदान करती हैं। अधिकांश छात्रवृत्तियाँ पूर्ण या अंशकालिक पीएचडी कार्यक्रमों के लिए धन मुहैया कराती हैं, जबकि कुछ कम छात्रवृत्तियाँ एम.लिट जैसे एक वर्षीय मास्टर स्तर के पाठ्यक्रमों के लिए सहायता प्रदान करती हैं। कुछ व्यावसायिक और चिकित्सा डिग्रियाँ इसके लिए पात्र नहीं हैं।

हर साल लगभग 80 छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जाती हैं: लगभग 25 संयुक्त राज्य अमेरिका के आवेदकों को और 55 शेष विश्व के आवेदकों को। छात्र कैम्ब्रिज में एक जीवंत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में शामिल होते हैं, जहाँ उन्हें विश्वस्तरीय शैक्षणिक संसाधनों, मार्गदर्शन, कार्यक्रमों और नेतृत्व विकास के अवसरों का लाभ मिलता है। स्नातक होने के बाद, वे 1,700 से अधिक सदस्यों वाले एक प्रभावशाली वैश्विक पूर्व छात्र नेटवर्क का हिस्सा बन जाते हैं जो अपने क्षेत्रों और समुदायों में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।

आवेदकों को यूके के बाहर के देशों का नागरिक होना चाहिए, अपने चुने हुए पाठ्यक्रम के लिए शैक्षणिक और अंग्रेजी भाषा की आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए, और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय स्नातक आवेदन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना चाहिए ।

अंतिम तिथि: अमेरिका में रहने वाले अमेरिकी नागरिकों के लिए 15 अक्टूबर 2025, तथा पाठ्यक्रम के आधार पर अन्य सभी आवेदकों के लिए 2 दिसंबर 2025 या 7 जनवरी 2026।

 “अधिक जानकारी के लिए, अल-फनार मीडिया स्कॉलरशिप डेटाबेस का अनुसरण करें।”

SOURCE: 

नोट: 

(इस लेख का स्रोत और श्रेय अल-फनार मीडिया को जाता है। हमारा उद्देश्य सिर्फ इस महत्वपूर्ण जानकारी को हिन्दी के पाठकों तक पहुंचाना है।)   

KEYWORDS: 
  • The Gates Cambridge Scholarships, 
  • Bill & Melinda Gates Foundation, 
  • Post Graduate Study, Scholarships, 
  • Al-Fanar Media, 
  • Fully Funded Postgraduate Scholarships, 
  • University of Cambridge.
 


सोमवार, 8 सितंबर 2025

“जब आंखें देखती हैं पर मन नहीं समझता: धोखे की पहचान का विज्ञान”

“जब आंखें देखती हैं पर मन नहीं समझता: धोखे की पहचान का विज्ञान”

“When the eyes see but the mind does not understand: The science of identifying deception”




“सच्चाई और छल के बीच मनुष्य: Freud से Neuroscience तक की खोज”


मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत के आधार पर, "आँखें देखती हैं, लेकिन दिमाग नहीं समझता" वाक्यांश अचेतन मानसिक प्रक्रियाओं से संबंधित है जो इस बात को प्रभावित करती हैं कि हम भ्रामक व्यवहार को कैसे समझते हैं और उस पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। 

मनोविश्लेषणात्मक शोध आमतौर पर झूठ का पता लगाने के लिए आँखों की प्रत्यक्ष गतिविधियों पर केंद्रित नहीं होता, जो एक ऐसी अवधारणा है जो अनुभवजन्य साक्ष्यों द्वारा काफी हद तक गलत साबित हो चुकी है। इसके बजाय, सिगमंड फ्रायड से उत्पन्न मनोविश्लेषणात्मक अवधारणाएँ, आत्म-प्रवंचना सहित, धोखे के पीछे की अचेतन प्रेरणाओं और अर्थों पर केंद्रित होती हैं। 

शुक्रवार, 22 अगस्त 2025

"कंफर्ट वीमेन विवाद: जापान और दक्षिण कोरिया के संबंधों पर ऐतिहासिक कलंक"

"कंफर्ट वीमेन विवाद: जापान और दक्षिण कोरिया के संबंधों पर ऐतिहासिक कलंक"
The Comfort Women Dispute: A Historical Wound in Japan-South Korea Relations


"कंफर्ट वीमेन" (Comfort Women / 慰安婦 Ianfu) शब्द का उपयोग उन महिलाओं के लिए किया जाता है जिन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना द्वारा यौन दासता के लिए मजबूर किया गया था। यह मुद्दा जापान और दक्षिण कोरिया के बीच आज भी एक गहरा राजनीतिक, सामाजिक और नैतिक विवाद बना हुआ है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:


by Tokyo Review 


"कंफर्ट वीमेन" क्या थीं?


by wikipedia 

  • द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान (1930 के दशक से लेकर 1945 तक), जापानी साम्राज्य ने "कंफर्ट स्टेशन्स" (Comfort Stations) नामक यौन दासता केंद्र बनाए।

  • इन केंद्रों पर हजारों महिलाएं मजबूर की गईं या धोखे से लाई गईं, जिनसे जापानी सैनिकों को "मनोरंजन" प्रदान करने के लिए बार-बार बलात्कार किया गया।

  • ऐसी महिलाओं की संख्या 50,000 से लेकर 200,000 तक बताई जाती है (संख्या विवादित है), जिनमें से बहुत बड़ी संख्या में कोरियाई महिलाएं थीं, क्योंकि उस समय कोरिया पर जापान का उपनिवेशवादी शासन था (1910–1945)।


दक्षिण कोरिया से क्या संबंध है?

  1. कोरिया उस समय जापान का उपनिवेश था — कोरियाई महिलाओं को जबरन या धोखे से जापानी "कंफर्ट स्टेशनों" में ले जाया गया।

  2. बहुत सी पीड़िताएं जीवित रहीं और उन्होंने 1990 के दशक में सामने आकर इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई।

  3. दक्षिण कोरियाई समाज और सरकार इसे आज भी एक राष्ट्रीय अपमान और मानवीय त्रासदी मानते हैं।


समस्या क्यों बनी हुई है?

1. जवाबदेही और माफी का मुद्दा:



  • जापान ने कई बार खेद प्रकट किया है (1993 का Kono Statement, 2015 समझौता आदि), लेकिन कई कोरियाई इसे "पूर्ण और ईमानदार क्षमा" नहीं मानते।

  • जापान कहता है कि इस विषय को 1965 की जापान-कोरिया संधि में समाप्त मान लिया गया था, जबकि कोरिया कहता है कि यह मुद्दा उस संधि में शामिल नहीं था।

2. 2015 समझौता और उसका विवाद:


The New York Times 

  • जापान और दक्षिण कोरिया ने 2015 में समझौता किया कि जापान $8.3 मिलियन डॉलर देगा पीड़िताओं की सहायता के लिए।

  • परन्तु दक्षिण कोरियाई जनता और कई पीड़िताओं ने इस समझौते को "कूटनीतिक समझौता, लेकिन नैतिक रूप से अस्वीकार्य" बताया।

3. स्मारक और जन भावना:



  • दक्षिण कोरिया और अन्य देशों (जैसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) में "कंफर्ट वीमेन" की मूर्तियाँ लगाई गई हैं। जापान इसे अपमानजनक और एकतरफा आरोप मानता है।

  • इस कारण जापान कई बार कूटनीतिक विरोध जताता है।


आज के संबंधों पर प्रभाव:


by East Asia Forum 

  • यह मुद्दा जनता की भावनाओं को भड़काता है, खासकर दक्षिण कोरिया में।

  • जापान को लगता है कि वह कई बार माफ़ी मांग चुका है, जबकि कोरिया को लगता है कि माफी में ईमानदारी और न्याय की कमी है

  • इसलिए यह मुद्दा दोनों देशों के बीच सामान्य कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को प्रभावित करता है


निष्कर्ष:

"कंफर्ट वीमेन" का मुद्दा सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान का जीवित घाव है। यह यौन हिंसा, उपनिवेशवाद, और ऐतिहासिक न्याय से जुड़ा हुआ है।
जब तक पीड़िताओं और उनके प्रतिनिधियों को लगता है कि उन्हें पूरा न्याय नहीं मिला, यह मामला दक्षिण कोरिया और जापान के बीच सबसे संवेदनशील और विवादित मुद्दों में से एक बना रहेगा।

नीचे प्रमुख शोध पत्र, डॉक्यूमेंटरी फिल्में, और कुछ पीड़िताओं की जीवित (या पहले की गई) गवाहियाँ दी गई हैं जो "कंफर्ट वीमेन" से संबंधित हैं — खासतौर पर जापान और दक्षिण कोरिया की संदर्भ में:


प्रमुख शोध-पत्र और अकादमिक प्रकाशन

  • “Unfolding the ‘Comfort Women’ Debates: Modernity, Violence, Women’s Voices” (Maki Kimura, 2016) — इस पुस्तक में कंफर्ट वुमेन के ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक आयामों पर विस्तृत विश्लेषण है। ZNetwork+2Wikipedia+2Trauma Politics+2

  • “Denying the Comfort Women: The Japanese State's Assault on Historical Truth” (Routledge, 2018) — जापानी सरकार की इतिहास संशोधन नीतियों की समीक्षा है।  Wikipedia


महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंटरी एवं फिल्में

  • The Apology (2016, निर्देशिका: Tiffany Hsiung) — तीन पूर्व कंफर्ट वुमेन की व्यक्तिगत कथाएँ (जिसमें Gil Won-ok सहित) और न्याय की तलाश पर केंद्रित एक पुरस्कृत डॉक्यूमेंटरी है। Wikipedia

  • Within Every Woman (2012) — इसी विषय पर TIFF‑निर्देशिका Tiffany Hsiung की डॉक्यूमेंटरी, वार टाइम यौन अत्याचार और महिलाओं के जीवन पर प्रभाव को दर्शाती है।                                                                                  Trauma Politics+2Korean Legal Studies+2Wikipedia+2

  • The Murmuring (1995) — दक्षिण कोरियाई महिलाओं के प्रदर्शन-आधारित दस्तावेज़ी, जिन्होंने जापान और कोरिया सरकारों से सार्वजनिक माफी की मांग की। Korean Legal Studies

  • Habitual Sadness: Korean Comfort Women Today (1999) — “House of Sharing” की रोजमर्रा की ज़िन्दगी को दिखाने वाली डॉक्यूमेंटरी ZNetwork+6Korean Legal Studies+6DW+6

  • Comfort Women: One Last Cry (2013) — एशिया और यूरोप में प्रभावित पीड़िताओं की आवाज़ों को समेटने वाली डॉक्यूमेंटरी, बहु-देशों और बहु-पीड़ित दृष्टिकोणों पर आधारित है Glamour+8Korean Legal Studies+8DW+8

  • Kokosuni (2022, निर्देशिका: Lee Seok‑jae, KBS) — कोरियाई कंफर्ट वुमेन की वास्तविकताओं और इतिहास संशोधनवाद (revisionism) के विरुद्ध बनाई गई डॉक्यूमेंटरी है Wikipedia


प्रमुख जीवित / पहले गवाही देने वाली पीड़िताएँ

Lee Yong‑soo

  • कंबफर्ट वुमेन के रूप में जबरन किए जाने का अनुभव, लगभग 4–5 सैनिक रोज़ आता था; जल、电ैत यंत्रादि से यातनाएं सहन कीं; कई वर्षों बाद सामने आईं; दक्षिण कोरिया में न्याय अभियान की अगुआ थीं। उन्हें वहाँ मास्टर डिग्री तक मिली और US Congress में भी बतौर गवाह शामिल हुईं।                                        WikipediaLAUM Social Justice Museum

Chung Seo‑woon (1924–2004)

  • 14 वर्ष की आयु में जबरन कब्जे में ली गईं; सालों तक जापान, ताइवान, सिंगापुर, इंडोनेशिया में हुईं। बाद में मानवाधिकार कार्यकर्ता बनीं; कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जापान से माफी की माँग की; सुनियोजित प्रयासों में अग्रणी रहीं।WikipediaLAUM Social Justice Museum

Kim Hak‑sun

  • दक्षिण कोरिया की वह पहली महिला जिन्होंने 1991–1992 में सार्वजनिक रूप से अपने अनुभव साझा किए, जिससे “comfort women” आंदोलन को शक्ति और पहचान मिली।                                                                                                  Korean Legal Studies+4ZNetwork+4DW+4

अन्य उल्लेखनीय वयोवृद्ध गवाह

  • Kim Bok‑dong, Gil Won‑ok, Lee Ok‑seon (House of Sharing निवासी), जिनके बयान प्रधानमंत्री Abe और कोरियाई सरकार को “कम माफी” स्वीकार न करने की प्रेरणा बने। Korean Legal Studies+7DW+7Wikipedia+7


निष्कर्ष सारांश

श्रेणी         विवरण
शोध-पत्रKimura‑ और Routledge‑जैसी पुस्तकें ऐतिहासिक दृष्टिकोण और विश्लेषण देती हैं
डॉक्यूमेंटरीThe Apology, Within Every Woman, Kokosuni आदि जीवन‑कथा और आंदोलन की दस्तावेज़ फिल्में हैं
गवाह और        पीड़िता


Lee Yong‑soo, Chung Seo‑woon, Kim Hak‑sun और अन्य पूर्वगवाह जिन्होंने सत्याग्रह और सार्वजनिक अभियान चलाया

ये रहे विषय से संबंधित प्रमुख अकादमिक शोध-पत्र, डॉक्यूमेंटरी फिल्में, और पीड़िताओं की जीवित गवाहियाँ। दोनों का विस्तृत संकलन प्रस्तुत है:


प्रमुख अकादमिक शोध-पत्र (Research Papers)

  1. “Uncomfortable ‘Comfort Women’: Examining shame culture…” — Janice Lee (Pepperdine University, 2018) यह पेपर कोरियाई‑अमेरिकी और जापानी‑अमेरिकी समुदायों में शर्म की संस्कृति और आंतरिक संघर्षों पर केंद्रित है, व “comfort women” विषय से जुड़ा मानवीय दृष्टिकोण प्रदर्शित करता है।          Korean Film+13Pepperdine Digital Commons+13The New Yorker+13
  2. “Reconstructing the History of the ‘Comfort Women’ System: The Fruits of 28 years of Investigation…” — Edward Vickers & Su Zhiliang (Asia‑Pacific Journal, March 2021) लगभग तीन दशकों के इतिहास‑निर्माण प्रयासों, दस्तावेज़ों और साक्षात्कारों के आधार पर पूरे एशिया में “comfort women” प्रणाली की पुनर्निर्माण संरचना का विश्लेषण करता है।                          Asia-Pacific Journal: Japan Focus+1Korean Legal Studies+1

  3. अतिरिक्त शोध-पत्र समूह: Maki Kimura की Unfolding the ‘Comfort Women’ Debates और Routledge की Denying the Comfort Women जैसी पुस्तकें जो इस विषय पर विस्तृत ऐतिहासिक अनुसंधान प्रदान करती हैं।         Wikipedia



मुख्य डॉक्यूमेंटरी और फ़िल्में


नीचे दी गई सूची में प्रमुख और बहु‑दृष्टिकोण वाली डॉक्यूमेंटरी फ़िल्में शामिल हैं:

  • The Murmuring (1995, Byun Young‑Joo): ज़ोरदार दस्तावेज़ी जो जापान और कोरिया की सरकारों से सार्वजनिक माफी की मांग करती पीड़िताओं की कहानी को दिखाती है।                                                                                            The Movie Database+3Korean Legal Studies+3Korean Film+3

  • Habitual Sadness: Korean Comfort Women Today (1999, Byun Young‑Joo) “House of Sharing” में रहने वाली पूर्व पीड़िताओं की रोज़मर्रा ज़िंदगी और आंदोलन को दिखाता है।                                                                      Asia-Pacific Journal: Japan Focus+4Korean Legal Studies+4The Movie Database+4

  • My Own Breathing (2000, Byun Young‑Joo): यह Byun की ट्रिलॉजी की अंतिम कड़ी है, जिसमें पीड़िताओं की मौन कहानियों को बिना व्याख्या या संगीत के स्वयं उनके शब्दों में प्रस्तुत किया गया है।                                                      Korean Film+2The Movie Database+2Korean Film+2

  • Within Every Woman (2012, Tiffany Hsiung): WW II में हुए जापानी यौन अत्याचारों को उजागर करती डॉक्यूमेंटरी, जिसमें healing process और survivor experiences दिखाए गए हैं।                                                                Korean Film+7Korean Legal Studies+7Wikipedia+7

  • The Apology (2016, Tiffany Hsiung): तीन पूर्व “comfort women” (द. कोरिया, चीन, फिलिपीन्स की निवासी) की ज़िंदगी, लड़ाई और न्याय की मांग का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत विवरण; इस फिल्म को Peabody और duPont‑Columbia पुरस्कार मिला है।                                                                The Movie Database+3Wikipedia+3The Movie Database+3The Movie Database+2Icarus Films+2Reddit+2

  • Snowy Road (2015, Lee Na‑jeong): दो किशोर लड़कियों की कहानी जिन्हें जापानी कब्ज़े के समय जबरन “comfort women” बनाया गया—सेलिब्रेटेड ऐतिहासिक ड्रामा, मूलतः KBS पर टीवी‑स्पेशल के रूप में रिलीज़, बाद में सिनेमाघरों में प्रदर्शित।                                                    WUNRN+6Wikipedia+6The Movie Database+6

  • Shusenjo: The Main Battleground of the Comfort Women Issue (2019, Miki Dezaki): यह फिल्म जापान में हो रहे revisionist इतिहासवाद और विरोधियों के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करती है—नए युग की तीव्रतम बहसों में से एक।                                                                          Wikipedia+3Suma Ikeuchi+3The Movie Database+3

  • अन्य उल्लेखनीय: Twenty Two (2017) – बचे हुए 22 वरिष्ठ survivours की सदाबहार किस्से, Herstory (2018) – कानूनी संघर्ष की वास्तविक कहानी, और My name is KIM Bok‑dong (2019) – एक सक्रिय survivor की कहानी।          The Movie Database+1The Movie Database+1



प्रमुख जीवित / गवाही देने वाली पीड़िताएँ (Survivor      Testimonies)

  • Kim Hak-sun
    1991 में दक्षिण कोरिया की पहली महिला जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना अनुभव साझा किया। उनकी गवाही ने इस आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।                                                                                            Korean Legal Studies+2Asia-Pacific Journal: Japan Focus+2WUNRN+2
  • अन्य प्रमुख गवाहें जैसे Kim Bok-dong, Gil Won-ok, Lee Ok-seon, जिन्होंने सरकारों से माफी और न्याय की मांग में योगदान दिया। इनके प्रयासों से “statue of peace” आंदोलन और बुधवार की प्रदर्शनों को गति मिली।                                The Movie Database+1The Movie Database+1

Knowledge Hub

'जैसे-जैसे आप दृढ़ रहेंगे, आपका मार्ग स्पष्ट होता जाएगा': गैर-रेखीय कैरियर निर्माण का एक स

'जैसे-जैसे आप दृढ़ रहेंगे, आपका मार्ग स्पष्ट होता जाएगा': गैर-रेखीय कैरियर निर्माण का एक संदेश डेगन  ब्यूस  द्वारा  2 फरवरी, 2026 बी...